Tahzeeb Hafi Shayari ❤️ in Hindi | तहज़ीब हाफी शायरी

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Hindi Kala presents Viral Pakistani Shayar Tahzeeb Hafi Shayari in Hindi with English Lyrics & Translation. Collection of his all-famous Ghazals & Sher.

Tahzeeb Hafi | तहज़ीब हाफ़ी

Table of Contents

Tahzeeb Hafi Ghazals | तहज़ीब हाफी की ग़ज़लें

Aaj Jin Jheelo Ka Bas Kagaz Mein Naksha Rah Gaya | आज जिन झीलों का बस काग़ज़ में नक्शा रह गया

आज जिन झीलों का बस काग़ज़ में नक्शा रह गया
एक मुद्दत तक मैं उन आँखों से बहता रह गया

मैं उसे ना-क़ाबिल-ए-बर्दाश्त समझा था मगर
वो मेरे दिल में रहा और अच्छा ख़ासा रह गया

वो जो आधे थे तुझे मिलकर मुक़म्मल हो गए
जो मुक़म्मल था वो तेरे ग़म में आधा रह गया


Aankh Ki Khidkiya Khuli Hogi | आँख की खिड़कियाँ खुली होंगी

आँख की खिड़कियाँ खुली होंगी
दिल में जब चोरीयाँ हुई होंगी

या कहीं आइने गिरे होंगे
या कहीं लड़कियाँ हँसी होंगी

या कहीं दिन निकल रहा होगा
या कहीं बस्तियाँ जली होंगी

या कहीं हाथ हथकड़ी में क़ैद
या कहीं चूड़ियाँ पड़ी होंगी

या कहीं ख़ामशी की तक़रीबात
या कहीं घंटियाँ बजी होंगी

लौट आयेंगे शहर से भाई
हाथ में राखियाँ बँधी होंगी

उन दिनों कोई मर गया होगा
जिन दिनों शादियाँ हुई होंगी


Ajeeb Khawaab Tha Uske Badan Mein Kaayi Thi | अजीब ख़्वाब था उस के बदन में काई थी

अजीब ख़्वाब था उस के बदन में काई थी
वो इक परी जो मुझे सब्ज़ करने आई थी

íवो इक चराग़-कदा जिस में कुछ नहीं था मेरा
वो जल रही थी वो क़िंदील भी पराई थी

न जाने कितने परिंदो ने इस में शिरकत की
कल एक पेड़ की तरक़ीब-ए-रू-नुमाई थी

हवाओ आओ मिरे गाँव की तरफ देखो
जहाँ ये रेत है पहले यहाँ तराई थी

किसी सिपाह ने ख़ेमे लगा दिये है वहाँ
जहाँ ये मैं ने निशानी तिरी दबाई थी

गले मिला था कभी दुख भरे दिसम्बर से
मिरे वजूद के अंदर भी धुँद छाई थी


Ashq Jayia Ho Rahe The Dekh Kar Rota Na Tha | अश्क ज़ाएअ’ हो रहे थे देख कर रोता न था

अश्क ज़ाएअ’ हो रहे थे देख कर रोता न था
जिस जगह बनता था रोना मैं उधर रोता न था

सिर्फ़ तेरी चुप ने मेरे गाल गीले कर दिए
मैं तो वो हूँ जो किसी की मौत पर रोता न था

मुझ पे कितने सानहे गुज़रे पर इन आँखों को क्या
मेरा दुख ये है कि मेरा हम-सफ़र रोता न था

मैं ने उस के वस्ल में भी हिज्र काटा है कहीं
वो मिरे काँधे पे रख लेता था सर रोता न था

प्यार तो पहले भी उस से था मगर इतना नहीं
तब मैं उस को छू तो लेता था मगर रोता न था

गिर्या-ओ-ज़ारी को भी इक ख़ास मौसम चाहिए
मेरी आँखें देख लो मैं वक़्त पर रोता न था


Bata Yeh Abra Musawat Kyun Nahi Karta | बता ऐ अब्र मुसावात क्यूँ नहीं करता

बता ऐ अब्र मुसावात क्यूँ नहीं करता
हमारे गाँव में बरसात क्यूँ नहीं करता

महाज़-ए-इश्क़ से कब कौन बच के निकला है
तू बव गया है तो ख़ैरात क्यूँ नहीं करता

वो जिस की छाँव में पच्चीस साल गुज़रे हैं
वा पेड़ मुझ से कोई बात क्यूँ नहीं करता

मैं जिस के साथ कई दिन गुज़ार आया हूँ
वो मेरे साथ बसर रात क्यूँ नहीं करता

मुझे तू जान से बढ़ कर अज़ीज़ हो गया है
तो मेरे साथ कोई हाथ क्यूँ नहीं करता


Bicchad Kar Uss Ka Dil Lag Bhi Gaya To Kya Lagega | बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा

बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा
वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा

मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या न आऊँ
मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा

मैं जिस कोशिश से उस को भूल जाने में लगा हूँ
ज़ियादा भी अगर लग जाए तो हफ़्ता लगेगा

मिरे हाथों से लग कर फूल मिट्टी हो रहे हैं
मिरी आँखों से दरिया देखना सहरा लगेगा

मिरा दुश्मन सुना है कल से भूका लड़ रहा है
ये पहला तीर उस को नाश्ते में जा लगेगा

कई दिन उस के भी सहराओं में गुज़रे हैं ‘हाफ़ी’
सो इस निस्बत से आईना हमारा क्या लगेगा


Chechra Dekhe Tere Honth Aur Palkein Dekhe | चेहरा देखें तेरे होंट और पलकें देखें

चेहरा देखें तेरे होंट और पलकें देखें
दिल पे आँखे रखें तेरी साँसें देखें

सुर्ख़ लबों से सब्ज़ दुआएँ फूटी हैं
पीले फूलों तुम को नीली आँखें देखें

साल होने को आया है वो कब लौटेगा
आओ खेत की सैर को निकलें कूजें देखें

थोडी देर में जंगल हम को आक़ करेगा
बरगद देखें या बरगद की शाख़े देखें

मेरे मालिक आप तो सब कुछ कर सकते हैं
साथ चलें हम और दुनिया की आँखें देखें

हम तेरे होंटो की लर्ज़िश कब भूले हैं
पानी में पत्थर फेंके और लहरें देखें


Cheekhte Hai Dar-O-Deewar Nahi Hota Main | चीख़ते हैं दर-ओ-दीवार नहीं होता मैं

चीख़ते हैं दर-ओ-दीवार नहीं होता मैं
आँख खुलने पे भी बेदार नहीं होता मैं

ख़्वाब करना हो सफ़र करना हो या रोना हो
मुझ में ख़ूबी है बेज़ार नहीं होता में

अब भला अपने लिए बनना सँवरना कैसा
ख़ुद से मिलना हो तो तय्यार नहीं होता मैं

कौन आएगा भला मेरी अयादत के लिए
बस इसी ख़ौफ़ से बीमार नहीं होता मैं

मंज़िल-ए-इश्क़ पे निकला तो कहा रस्ते ने
हर किसी के लिए हमवार नहीं होता मैं

तेरी तस्वीर से तस्कीन नहीं होती मुझे
तेरी आवाज़ से सरशार नहीं होता मैं

लोग कहते हैं मैं बारिश की तरह हूँ ‘हाफ़ी’
अक्सर औक़ात लगातार नहीं होता मैं


Dil Mohabbat Mein Mubtala Ho Jaye | दिल मोहब्बत में मुब्तला हो जाए

दिल मोहब्बत में मुब्तला हो जाए
जो अभी तक न हो सका हो जाए

तुझ में ये ऐब है कि ख़ूबी है
जो तुझे देख ले तिरा हो जाए

ख़ुद को ऐसी जगह छुपाया है
कोई ढूँढे तो लापता हो जाए

मैं तुझे छोड़ कर चला जाऊँ
साया दीवार से जुदा हो जाए

बस वो इतना कहे मुझे तुम से
और फिर कॉल मुंक़ता’ हो जाए

दिल भी कैसा दरख़्त है ‘हाफ़ी’
जो तिरी याद से हरा हो जाए


Hum Tumhare Gham Se Bahar Aa Gaye | हम तुम्हारे ग़म से बाहर आ गए

हम तुम्हारे ग़म से बाहर आ गए
हिज्र से बचने के मंतर आ गए

मैं ने तुम को अंदर आने का कहा
तुम तो मेरे दिल के अंदर आ गए

एक ही औरत को दुनिया मानकर
इतना घुमा हूँ कि चक्कर आ गए

इम्तिहान-ए-इश्क़ मुश्किल था मगर
नक़्ल कर के अच्छे नंबर आ गए

तेरे कुछ आशिक़ तो गंगाराम हैं
और जो बाक़ी थे बिस्तर आ गए


Ik Haweli Hoon Uss Ka Dar Bhi Hoon | इक हवेली हूँ उस का दर भी हूँ

इक हवेली हूँ उस का दर भी हूँ
ख़ुद ही आँगन ख़ुद ही शजर भी हूँ

अपनी मस्ती में बहता दरिया हूँ
मैं किनारा भी हूँ भँवर भी हूँ

आसमाँ और जमीं की वुसअत देख
मैं इधर भी हूँ और उधर भी हूँ

ख़ुद ही मैं ख़ुद को लिख रहा हूँ ख़त
और मैं अपना नामा-बर भी हूँ

दास्ताँ हूँ मैं इक तवील मगर
तू जो सुन ले तो मुख़्तसर भी हूँ

एक फलदार पेड़ हूँ लेकिन
वक़्त आने पे बे-समर भी हूँ


Ik Tira Hizra Daimi Hai Mujhe | इक तिरा हिज्र दाइमी है मुझे

इक तिरा हिज्र दाइमी है मुझे
वर्ना हर चीज़ आरजी़ है मुझे

एक साया मिरे तआकुब में
एक आवाज़ ढूँडती है मुझे

मेरी आँखो पे दो मुक़दस हाथ
ये अंधेरा भी रौशनी है मुझे

मैं सुख़न में हूँ उस जगह कि जहाँ
साँस लेना भी शाइरी है मुझे

इन परिंदो से बोलना सीखा
पेड़ से ख़ामुशी मिली है मुझे

मैं उसे कब का भूल-भाल चुका
ज़िंदगी है कि रो रही है मुझे

मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ
पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे


Iss Ek Darr Se Khwaab Dekhta Nahi | इस एक डर से ख़्वाब देखता नहीं

इस एक डर से ख़्वाब देखता नहीं
जो देखता हूँ मैं वो भूलता नहीं

किसी मुंडेर पर कोई दिया जला
फिर इस के बाद क्या हुआ पता नहीं

अभी से हाथ काँपने लगे मिरे
अभी तो मैं ने वो बदन छुआ नहीं

मैं आ रहा था रास्ते में फुल थे
मैं जा रहा हूँ कोई रोकता नहीं

तिरी तरफ़ चले तो उम्र कट गई
ये और बात रास्ता कटा नहीं

मैं राह से भटक गया तो क्या हुआ
चराग़ मेरे हाथ में तो था नहीं

मैं इन दिनों हूँ ख़ुद से इतना बे-ख़बर
मैं बुझ चुका हूँ और मुझे पता नहीं

उस अज़दहे की आँख पूछती रहीं
किसी को ख़ौफ़ आ रहा है या नहीं

ये इश्क़ भी अजब कि एक शख़्स से
मुझे लगा कि हो गया हुआ नहीं

ख़ुदा करे वो पेड़ ख़ैरियत से हो
कई दिनों से उस का राब्ता नहीं


Jaane Wale Se Raabta Rah Jaye | जाने वाले से राब्ता रह जाए

जाने वाले से राब्ता रह जाए
घर की दीवार पर दिया रह जाए

इक नज़र जो भी देख ले तुझ को
वो तिरे ख़्वाब देखता रह जाए

इतनी गिर्हें लगी हैं इस दिल पर
कोई खोले तो खोलता रह जाए

कोई कमरे में आग तापता हो
कोई बारिश में भीगता रह जाए

नींद ऐसी कि रात कम पड़ जाए
ख़्वाब ऐसा कि मुँह खुला रह जाए

झील सैफ़-उल-मुलूक पर जाऊँ
और कमरे में कैमरा रह जाए


Jab Kisi Ek Ko Riha Kiya Jaye | जब किसी एक को रिहा किया जाए

जब किसी एक को रिहा किया जाए
सब असीरों से मशवरा किया जाए

रह लिया जाए अपने होने पर
अपने मरने पे हौसला किया जाए

इश्क़ करने में क्या बुराई है
हाँ किया जाए बारहा किया जाए

मेरा इक यार सिंध के उस पार
ना-ख़ुदाओं से राब्ता किया जाए

मेरी नक़लें उतारने लगा है
आईने का बताओ क्या किया जाए

ख़ामुशी से लदा हुआ इक पेड़
इस से चल कर मुकालिमा किया जाए


Jab Uski Tasveer Banaya Karta Tha | जब उस की तस्वीर बनाया करता था

जब उस की तस्वीर बनाया करता था
कमरा रंगो से भर जाया करता था

पेड़ मुझे हसरत से देखा करते थे
मैं जंगल में पानी लाया करता था

थक जाता था बादल साया करते करते
और फिर मैं बादल पे साया करता था

बैठा रहता था साहिल पे सारा दिन
दरिया मुझ से जान छुड़ाया करता था

बिंत-ए-सहरा रूठा करती थी मुझ से
मैं सहरा से रेत चुराया करता था


Kadam Rakhta Hai Jab Rasto Pe Yaar Aahista Aahista | क़दम रखता है जब रस्तों पे यार आहिस्ता आहिस्ता

क़दम रखता है जब रस्तों पे यार आहिस्ता आहिस्ता
तो छट जाता है सब गर्द-ओ-ग़ुबार आहिस्ता आहिस्ता

भरी आँखों से हो के दिल में जाना सहल थोड़ी है
चढ़े दरियाओं को करते हैं पार आहिस्ता आहिस्ता

नज़र आता है तो यूँ देखता जाता हूँ मैं उस को
कि चल पड़ता है जैसे कारोबार आहिस्ता आहिस्ता

उधर कुछ औरतें दरवाज़ों पर दौड़ी हुई आईं
इधर घोड़ों से उतरे शहसवार आहिस्ता आहिस्ता

किसी दिन कारख़ाना-ए-ग़ज़ल में काम निकलेगा
पलट आएँगे सब बे-रोज़गार आहिस्ता आहिस्ता

तिरा पैकर ख़ुदा ने भी तो फ़ुर्सत में बनाया था
बनाएगा तिरे ज़ेवर सुनार आहिस्ता आहिस्ता

मिरी गोशा-नशीनी एक दिन बाज़ार देखेगी
ज़रूरत कर रही है बे-क़रार आहिस्ता आहिस्ता


Kise Khabar Hai Ki Umra Bas Uss Pe Gaur Karne Mein Kat Rahi Hai | किसे ख़बर है कि उम्र बस उस पे ग़ौर करने में कट रही है

किसे ख़बर है कि उम्र बस उस पे ग़ौर करने में कट रही है
कि ये उदासी हमारे जिस्मों से किस ख़ुशी में लिपट रही है

अजीब दुख है हम उस के हो कर भी उस को छूने से डर रहे हैं
अजीब दुख है हमारे हिस्से की आग औरों में बट रही है

मैं उस को हर रोज़ बस यही एक झूट सुनने को फ़ोन करता
सुनो यहाँ कोई मसअला है तुम्हारी आवाज़ कट रही है

मुझ ऐसे पेड़ों के सूखने और सब्ज़ होने से क्या किसी को
ये बेल शायद किसी मुसीबत में है जो मुझ से लिपट रही है

ये वक़्त आने पे अपनी औलाद अपने अज्दाद बेच देगी
जो फ़ौज दुश्मन को अपना सालार गिरवी रख कर पलट रही है

सो इस तअ’ल्लुक़ में जो ग़लत-फ़हमियाँ थीं अब दूर हो रही हैं
रुकी हुई गाड़ियों के चलने का वक़्त है धुंध छट रही है


Khud Pe Dasht Ki Wahshat Ko Musallat Karuga | ख़ुद पे जब दश्त की वहशत को मुसल्लत करूँगा

ख़ुद पे जब दश्त की वहशत को मुसल्लत करूँगा
इस क़दर ख़ाक उड़ाऊँगा क़यामत करूँगा

हिज्र की रात मिरी जान को आई हुई है
बच गया तो मैं मोहब्बत की मज़म्मत करूँगा

जिस के साए में तुझे पहले पहल देखा था
मैं इसी पेड़ के नीचे तिरी बै’अत करूँगा

अब तिरे राज़ सँभाले नहीं जाते मुझ से
मैं किसी रोज़ अमानत में ख़यानत करूँगा

तेरी यादों ने अगर हाथ बटाया मेरा
अपने टूटे हुए ख़्वाबों की मरम्मत करूँगा

लैलतुल-क़द्र गुज़ारूँगा किसी जंगल में
नूर बरसेगा दरख़्तों की इमामत करूँगा


Kuch Jarurat Se Kam Kiya Gaya Hai | कुछ ज़रूरत से कम किया गया है

कुछ ज़रूरत से कम किया गया है
तेरे जाने का ग़म किया गया है

ता-क़यामत हरे भरे रहेंगे
इन दरख़्तों पे दम किया गया है

इस लिए रौशनी में ठंडक है
कुछ चराग़ो को नम किया गया है

क्या ये कम है कि आख़िरी बोसा
उस जबीं पर रकम किया गया है

पानियो को भी ख़्वाब आने लगे
अश्क दरिया में ज़म किया गया है

उन की आँखों का तजि़्करा कर के
मेरी आँखों को नम किया गया गया है

धूल में अट गए है सारे ग़ज़ाल
इतनी शिद्दत से रम किया गया है


Na Neend Aur Na Khwabo Se Aankh Bharni Hai | न नींद और न ख़्वाबों से आँख भरनी है

न नींद और न ख़्वाबों से आँख भरनी है
कि उस से हम ने तुझे देखने की करनी है

किसी दरख़्त की हिद्दत में दिन गुज़ारना है
किसी चराग़ की छाँव में रात करनी है

वा फूल और किसी शाख़ पर नहीं खिलना
वो ज़ुल्फ़ सिर्फ़ मिरे हाथ से सँवरनी है

तमाम नाख़ुदा साहिल से दूर हा जाएँ
समुंदरों से अकेले में बात करनी है

हमारे गाँव का हर फूल मरने वाला है
अब इस गली से वो ख़ुश-बू नहीं गुज़रनी है

तिरे ज़ियाँ पे मैं अपना जियाँ न कर बैठूँ
कि मुझ मुरीद का मुर्शिद औवेस क़र्नी है


Parayi Aag Pe Roti Nahi Banaunga | पराई आग पे रोटी नहीं बनाऊँगा

पराई आग पे रोटी नहीं बनाऊँगा
मैं भीग जाऊँगा छतरी नहीं बनाऊँगा

अगर ख़ुदा ने बनाने का इख़्तियार दिया
अलम बनाऊँगा बर्छी नहीं बनाऊँगा

फ़रेब दे के तिरा जिस्म जीत लूँ लेकिन
मैं पेड़ काट के कश्ती नहीं बनाऊँगा

गली से कोई भी गुज़रे तो चौंक उठता हूँ
नए मकान में खिड़की नहीं बनाऊँगा

मैं दुश्मनों से अगर जंग जीत भी जाऊँ
तो उन की औरतें क़ैदी नहीं बनाऊँगा

तुम्हें पता तो चले बे-ज़बान चीज़ का दुख

मैं अब चराग़ की लौ ही नहीं बनाऊँगा

मैं एक फ़िल्म बनाऊँगा अपने ‘सरवत’ पर

और इस में रेल की पटरी नहीं बनाऊँगा


Sahra Se Aane Wali Hawaon Mein Rait Hai | सहरा से आने वाली हवाओं में रेत है

सहरा से आने वाली हवाओं में रेत है
हिजरत करूँगा गाँव से गाँव में रेत है

ऐ क़ैस तेरे दश्त को इतनी दुआएँ दीं
कुछ भी नहीं है मेरी दुआओं में रेत है

सहरा से हो के बाग़ में आ हूंँ सैर को
हाथों में फूल हैं मिरे पाँव में रेत है

मुद्दत से मेरी आँख में इक ख़्वास है मुक़ीम
पानी में पेड़ पेड़ की छाँव में रेत है

मुझ सा कोई फ़क़ीर नहीं है कि जिस के पास
कश्कोल रेत का है सदाओं में रेत है


Shor Karuga Aur Na Kuch Bhi Boluga | शोर करूँगा और न कुछ भी बोलूँगा

शोर करूँगा और न कुछ भी बोलूँगा
ख़ामोशी से अपना रोना रो लूँगा

सारी उम्र इसी ख़्वाहिश में गुज़री है
दस्तक होगी और दरवाज़ा खोलूँगा

तन्हाई में ख़ुद से बातें करनी हैं
मेरे मुँह में जो आएगा बोलूँगा

रात बहुत है तुम चाहो तो सो जाओ
मेरा क्या है मैं दिन में भी सो लूँगा

तुम को दिल की बात बतानी है लेकिन
आँखें बंद करो तो मुट्ठी खोलूँगा


So Rahege Ki Jaagte Rahege | सो रहेंगे कि जागते रहेंगे

सो रहेंगे कि जागते रहेंगे
हम तिरे ख़्वाब देखते रहेंगे

तू कहीं और ढूँढता रहेगा
हम कहीं और ही खिले रहेंगे

राहगीरों ने रह बदलनी है
पेड़ अपनी जगह खड़े रहे हैं

बर्फ़ पिघलेगी और पहाड़ों में
सालहा-साल रास्ते रहेंगे

सभी मौसम हैं दस्तरस में तिरी
तू ने चाहा तो हम हरे रहेंगे

लौटना कब है तू ने पर तुझ को
आदतन ही पुकारते रहेंगे

तुझ को पाने में मसअला ये है
तुझ को खोने के वसवसे रहेंगे

तू इधर देख मुझ से बातें कर
यार चश्मे तो फूटते रहेंगे


Taarikiyo Ko Aag Lage Aur Diya Jale | तारीकियों को आग लगे और दिया जले

तारीकियों को आग लगे और दिया जले
ये रात बैन करती रहे और दिया जले

उस की ज़बाँ में इतना असर है कि निस्फ़ शब
वो रौशनी की बात करे और दिया जले

तुम चाहते हो तुम से बिछड़ के भी ख़ुश रहूँ
या’नी हवा भी चलती रहे और दिया जले

क्या मुझ से भी अज़ीज़ है तुम को दिए की लौ
फिर तो मेरा मज़ार बने और दिया जले

सूरज तो मेरी आँख से आगे की चीज़ है
मैं चाहता हूँ शाम ढले और दिया जले

तुम लौटने में देर न करना कि ये न हो
दिल तीरगी में घेर चुके और दिया जले


Tera Chehra Tere Honth Aur Palkein Dekhe | तेरा चेहरा तेरे होंठ और पलकें देखें

तेरा चेहरा तेरे होंठ और पलकें देखें
दिल पे आँखें रक्खे तेरी साँसें देखें

मेरे मालिक आप तो ऐसा कर सकते हैं
साथ चले हम और दुनिया की आँखें देखें

साल होने को आया है वो कब लौटेगा
आओ खेत की सैर को निकले कुंजें देखें

हम तेरे होंठों को लरजिश कब भूलें हैं
पानी में पत्थर फेंकें और लहरें देखें


Tera Chup Rehna Mere Zehan Mein Kya Baith Gaya | तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया

हिन्दी लिरिक्स

तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया
इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया

यूँ नहीं है कि फ़क़त मैं ही उसे चाहता हूँ
जो भी उस पेड़ की छाँव में गया बैठ गया

इतना मीठा था वो ग़ुस्से भरा लहजा मत पूछ
उस ने जिस जिस को भी जाने को कहा बैठ गया

अपना लड़ना भी मोहब्बत है तुम्हें इल्म नहीं
चीख़ती तुम रही और मेरा गला बैठ गया

उस की मर्ज़ी वो जिसे पास बिठा ले अपने
इस पे क्या लड़ना फलाँ मेरी जगह बैठ गया

बात दरियाओं की सूरज की न तेरी है यहाँ
दो क़दम जो भी मेरे साथ चला बैठ गया

बज़्म-ए-जानाँ में नशिस्तें नहीं होतीं मख़्सूस
जो भी इक बार जहाँ बैठ गया बैठ गया

Lyrics in English with Meaning (Translation)

Tera Chup Rehna Mere Jehan Mein Kya Baith Gaya
Itni Aawazein Tujhe Di Ki Galaa Baith Gaya

(Your silence has sat in my mind like this
Gave you so many calls that my throat got choked)

Yun Nahi Hai Ki Faqat Main Hi Usse Chaahta Hoon
Jo Bhi Uss Pedh Ki Chhanv Mein Gaya Baith Gaya

(It’s not like anything why I only want her
Whoever went to the shade of that tree sat down there)

Itna Meetha Tha Woh Gusse Bhara Lehza Mat Pooch
Uss Ne Jis Jis Ko Bhi Jaane Ko Kaha Baith Gaya

(Don’t ask me how that angry tone was so sweet
whoever she asked to go sat down there with her)

Apna Ladna Bhi Mohabbat Hai Tumhe Ilm Nahi
Cheekhti Tum Rahi Aur Mera Galaa Baith Gaya

(You don’t know that our fight is also love
you only screamed and my throat got tight)

Uss Ki Marzi Woh Jise Paas Bitha Le Apne
Iss Pe Kya Ladna Falaa Meri Jagah Baith Gaya

(It’s her choice whom she wants to sit next to her
Why to fight over this so-and-so sat in my place)

Baat Dariyaon Ki Sooraj Ki Naa Teri Hai Yahan
Do Kadam Jo Bhi Mere Saath Chala Baith Gaya

(It’s not about the rivers and the sun here but yours
Whoever walked two steps with me sat there)

Bazm-E-Jaana Mein Nashistey Nahi Hoti Makhsoos
Jo Bhi Ek Baar Jahan Baith Gaya Baith Gaya

(​​In dreams my love, there are no special seats
whoever once sat down there just sat down)


Teri Taraf Mera Khayal Kya Gaya | तेरी तरफ़ मेरा ख़याल क्या गया

तेरी तरफ़ मेरा ख़याल क्या गया
के फिर मैं तुझको सोचता चला गया

ये शहर बन रहा था मेरे सामने
ये गीत मेरे सामने लिखा गया

ये वस्ल सारी उम्र पर मुहीत है
ये हिज्र एक रात में समा गया

मुझे किसी की आस थी न प्यास थी
ये फूल मुझको भूल कर दिया गया

बिछड़ के साँस खेंचना मुहाल था
मैं ज़िंदगी से हाथ खेंचता गया

मैं एक रोज दस्त क्या गया के फिर
वो बाग़ मेरे हाथ से चला गया


Tune Kya Kindeel Jala Di Shehzadi | तू ने क्या क़िंदील जला दी शहज़ादी

तू ने क्या क़िंदील जला दी शहज़ादी
सुर्ख़ हुई जाती है वादी शहज़ादी

शीश-महल को साफ़ किया तिरे कहने पर
आइनों से गर्द हटा दी शहज़ादी

अब तो ख़्वाब-कदे से बाहर पाँव रख
लौट गए है सब फ़रियादी शहज़ादी

तेरे ही कहने पर एक सिपाही ने
अपने घर को आग लगा दी शहज़ादी

मैं तेरे दुश्मन लश्कर का शहज़ादा
कैसे मुमकिन है ये शादी शहज़ादी


Waise Maine Duniya Mein Kya Dekha Hai | वैसे मैंने दुनिया में क्या देखा है

वैसे मैं ने दुनिया में क्या देखा है
तुम कहते हो तो फिर अच्छा देखा है

मैं उस को अपनी वहशत तोहफ़े में दूँ
हाथ उठाए जिस ने सहरा देखा है

बिन देखे उस की तस्वीर बना लूँगा
आज तो मैं ने उस को इतना देखा है

एक नज़र में मंज़र कब खुलते हैं दोस्त
तू ने देखा भी है तो क्या देखा है

इश्क़ में बंदा मर भी सकता है मैं ने
दिल की दस्तावेज़ में लिखा देखा है

मैं तो आँखें देख के ही बतला दूँगा
तुम में से किस किस ने दरिया देखा है

आगे सीधे हाथ पे एक तराई है
मैं ने पहले भी ये रस्ता देखा है

तुम को तो इस बाग़ का नाम पता होगा
तुम ने तो इस शहर का नक़्शा देखा है


Yeh Ek Baat Samajhne Mein Raat Ho Gayi Hai | ये एक बात समझने में रात हो गई है

ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है

मैं अब के साल परिंदों का दिन मनाऊँगा
मिरी क़रीब के जंगल से बात हो गई है

बिछड़ के तुझ से न ख़ुश रह सकूंगा सोचा था
तिरी जुदाई ही वजह-ए-नशात हो गई है

बदन में एक तरफ़ दिन जुलूअ मैं ने किया
बदन के दूसरे हिस्से में रात हो गई है

मैं जंगलों की तरफ़ चल पडा हूंँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है

रहेगा याद मदीने से वापसी का सफ़र
मैं नज़्म लिखने लगा था कि नात हो गई है

Zakhmon Ne Mujh Mein Darwaze Khole Hai | ज़ख़्मों ने मुझ में दरवाज़े खोले हैं

ज़ख़्मों ने मुझ में दरवाज़े खोले हैं
मैं ने वक़्त से पहले टाँके खोले हैं

बाहर आने की भी सकत नहीं हम में
तू ने किस मौसम में पिंजरे खोले हैं

बरसों से आवाज़ें जमती जाती थीं
ख़ामोशी ने कान के पर्दे खोले हैं

कौन हमारी प्यास पे डाका डाल गया
किस ने मश्कीज़ों के तस्मे खोले हैं

वर्ना धूप का पर्बत किस से कटता था
उस ने छतरी खोल के रस्ते खोले हैं

ये मेरा पहला रमज़ान था उस के बग़ैर
मत पूछो किस मुँह से रोज़े खोले हैं

यूँ तो मुझ को कितने ख़त मौसूल हुए
इक दो ऐसे थे जो दिल से खोले हैं

मन्नत मानने वालों को मालूम नहीं
किस ने आ कर पेड़ से धागे खोले हैं

दरिया बंद किया है कूज़े में ‘तहज़ीब’
इक चाबी से सारे ताले खोले हैं

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